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मैं श्री कुचामन पुस्तकालय हूँ

मैं श्री कुचामन पुस्तकालय अपने परिजनों एवं सभी पुस्तक प्रेमियों से संबोधित हूँ। मैं जन्म से लगभग एक दशक तक अस्थायी निवासों में रहा। सन 1938 में अध्ययन प्रेमी, समाजसेवी एवं दूरदृष्टा श्री झूंझालाल जी बोहती के सद्प्रयासों एवं राजा साहब श्री हरिसिंह के उदार हृदय से मुझे स्थायी निवास उपलब्ध हुआ।

शताब्दी वर्ष के अवसर पर मैं उन सभी कर्मठ, सेवा भावी एवं कुशल प्रशासकों को स्मरण करते हुए उन्हें नमन करना चाहता हूँ।

1938 से 1944 की समयावधि में मुझे श्री गोवर्धन लाल जी काबरा का सान्निध्य मिला। आप श्री तत्कालीन राजा साहब के मुंशी थे। आप संस्कृत, संगीतशास्त्र एवं व्याकरण के बड़े ज्ञाता थे। कुशल प्रशासक होने के साथ-साथ आप में लेखकीय कौशल भी था।

1944 से 1954 एवं 1972 से 1975 तक मुझे श्री मदन गोपाल जी काबरा का सान्निध्य मिला। आप कुचामन ठिकाने के कामदार रहे। आपके प्रयासों से मुझे सभी आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति हुई। आपकी उपस्थिति में मेरा रजत जयंती महोत्सव मनाया गया। कुशल प्रशासक, लेखकीय कौशल के साथ-साथ आप समाज सेवा के कई प्रकल्पों से जुड़े रहे।

1954 से 1957 में मुझे श्री वल्लभ जी सारड़ा की सरपरस्ती मिली। मेरे स्थायी निर्माण में पड़ोसी होने के नाते आपकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। आप प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी होने के साथ समाज सेवा के कार्यों से सदैव जुड़े रहे।

1957 से 1960 की समयावधि में मुझे सेठ श्री सदासुख जी काबरा का सान्निध्य मिला। बालिका एवं महिला शिक्षा के क्षेत्र में आपका योगदान उल्लेखनीय रहा। जवाहर विद्यालय को क्रमोन्नत करने में आपने अथक श्रम किया। आप संत-महात्माओं से सत्संग करते रहते थे।

1960 से 1967 के काल में मुझे स्नेह स्पर्श मिला श्री कन्हैयालाल जी साराफ का। आप राष्ट्रीय विचारधारा से जुड़े रहे। स्वतंत्रता आंदोलन में आपकी भूमिका अग्रणी की तरह रही। आपके कार्यकाल की बहुत सी स्मृतियां मेरे मानस पटल पर अंकित हैं।

इसी क्रम में 1967 से 1972 तक श्री कुंदनमल जी कोठारी ने मेरे परिवार के मुखिया की भूमिका निभाई। आपने कुशल व्यवसाई होने के साथ-साथ समाज सेवा के कई प्रकल्पों को पूरा करने में अपना योगदान दिया।

1975 से 1982 में मुझे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से जुड़े श्री परसराम जी मांडणिया का सान्निध्य मिला। आप एक कुशल व्यवसाई होने के साथ-साथ अनुशासनप्रिय व्यक्ति थे। आपकी सादा जीवन शैली प्रेरक रही।

1982 से 1990 एवं 1993 से 1999 तक मैं एक और युग पुरुष के सान्निध्य में रहा।

बालकृष्ण सारड़ा समाज सेवा की पाठशाला रहे। पुस्तकालय में आपने विशाल सभा कक्ष का निर्माण करवाया। कुचामन नगर का वर्तमान स्वरूप आपकी कल्पना को ही साकार करता है।

1990 से 1993 एवं 1996 से 1999 तक में एक ईमानदार, बेदाग छवि के धनी, लोकप्रिय राजनेता श्री हरिश्चन्द्र कुमावत के अध्यक्षीय काल में मैंने अपना जीवन बिताया। आप राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से आजीवन जुड़े रहे। राजनीति को नई भाषा दी, मुहावरे गढ़े। आपकी सौम्यता और विनम्रता आकर्षक बनी रही।

1999 से 2002 एवं 2021 से 2024 तक मेरे मुखिया एक ऊर्जावान एवं कल्पनाशील, कवि हृदय के धनी श्री नटवर लाल बक्ता रहे। आप ओजस्वी वक्ता रहे। आपकी वाक्पटुता आकर्षक एवं प्रेरणास्पद रहती थी। आपके योगदान को रेखांकित करने के लिए आपको कुचामन रत्न से नवाजा गया। कुचामन का इतिहास आपकी शोधपरक रचना रही। काव्य संग्रह भी प्रकाशित हुए। नगरपालिका के चेयरमेन रहते हुए भी आपने कई नवीन आयाम स्थापित किए। संगीत सदन की स्थापना कुचामन नगर को आपकी एक उत्कृष्ट देन रही।

2002 से 2005 तक मुझे फिर एक साहित्य प्रेमी, वेद ज्ञाता एवं संगीत के जानकार श्री प्रकाशचन्द्र जी आर्य का साथ मिला। आपका जीवन संघर्षमय रहा। आपकी उपस्थिति से हर विचार गोष्ठी जीवंत हो उठती थी। दृष्टांत एवं उद्धरण आपकी जुबान पर रहा करते थे। धर्मनिष्ठ एवं सादा जीवन के आप पर्याय रहे। आपकी विनोदप्रियता भी उल्लेखनीय थी। राजनीति के रूप में भी आपकी छवि निर्विवाद रही।

2008 से 2021 तक सर्वाधिक लम्बा अध्यक्षीय कार्यकाल शिक्षाविद् श्री गुलाबचन्द्र शर्मा ने वहन किया। आपने नगर की विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं में अपना योगदान दिया। आपने एक प्रखर वक्ता, लेखक एवं पत्र वाचक के रूप में ख्याति प्राप्त की। राजस्थान शिक्षक संघ के संयोजक भी रहे।

2024 से 2025 तक अध्यक्षीय कार्यकाल का निर्वहन श्री महेन्द्र पारिक ने किया। आपने अति व्यस्तता के बाद भी मेरे आपातकाल को देखते हुए अपनी स्वीकृति दी। आप विधि स्नातक हैं। वकालत का कार्य करते हैं। अदालती मामलों में आपका सहयोग सराहनीय रहा।

सन 2005 से 2008 एवं 2025 से निरंतर श्री शिव कुमार अग्रवाल ने मुझे सजाया और संवारा। आप एक कुशल व्यवसायी होने के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं तथा समाज सेवा के विभिन्न प्रकल्पों को मूर्त रूप देने में कुशल हैं। आपकी सेवाओं को सम्मान देते हुए आपको “कुचामन रत्न” से नवाजा गया है। साथ ही अनेक संस्थाओं एवं राज्य सरकार से आपको पुरस्कृत किया गया है।

मेरा शताब्दी समारोह इन्हीं के नेतृत्व में बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। साथ ही एक समृद्ध पुस्तकालय के रूप में मुझे संवारने का चयन किया जा रहा है।

समाज में हमारी वर्तमान भूमिका

आज श्री कुचामन पुस्तकालय शिक्षा, ज्ञान और समाज सेवा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यह पुस्तकालय विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए प्रेरित करता है, पाठकों को मार्गदर्शन प्रदान करता है और समाज में पठन संस्कृति को सशक्त बनाने में सक्रिय योगदान देता है।

पुस्तकालय का उद्देश्य भविष्य की पीढ़ियों के लिए ज्ञान का संरक्षण करना और शिक्षा के माध्यम से सामाजिक विकास को समर्थन देना है।

Government Digital Library Initiative

Rashtriya e-Pustakalaya
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